Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 62, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 62, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 62 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
अनया पौरुषी सत्ता सत्तास्याः पौरुषेण च ।
लक्ष्यते भुवनं यावद्द्वे एकात्मतयैव हि ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
इससे पुरुष की अदृष्टसम्बन्धिनी सत्ता
(फलावश्यम्भावरूप स्थिति) लक्षित होती है । जब तक तीन भुवन हैं, तब तक यह व्यवस्था
है । प्रलय होने के पश्चात् ये दो सत्ताएँ एकात्मता से (अभेद से) स्थित होती हैं