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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 63, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 63, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 63 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

सर्वाकारमयं ब्रह्मैवेदं ततं मिथ्याज्ञानवद्भिः शक्तिशक्तिमत्त्वे अवयवावयविरूपे कल्पिते न पारमार्थिके ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

यदि परमार्थदुष्टि से देखा जाय, तो यह विस्तृत प्रपंच ब्रह्म ही है। किन्तु मिथ्याज्ञानवाले व्यक्तियों ने शक्ति ओर शक्तिमान्‌, अवयव ओर अवयवी, इस प्रकार से भेद की कल्पना कर रक्खी हे, यह भेद पारमार्थिक नहीं हे