Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 64, Verse 19

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 64, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 64 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

तेजःकणत्वमादत्ते चित्तं तन्मात्रकल्पनात् । शनैः स्वस्मात्परिस्पन्दाद्बीजमङ्कुरतामिव ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे बीज अपने स्पन्दन से धीरे- धीरे अंकुरित होता है, वैसे ही अपने स्पन्दन से धीरे-धीरे पंचतन्मात्राओं की कल्पना करने के बाद चित्त तेजःकणता को धारण करता है