Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 64, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 64, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 64 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
कश्चिद्द्रागिति देहादिकलनाद्याति देहताम् ।
भ्रान्तित्वं तदतद्रूपं गन्धर्वैश्च वसत्पुरम् ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
कोई (जो उपासक नहीं है) ओर पुण्यात्मा ही, इस प्रकार दिव्य देह आदि की भावना
से झटपट देव आदि की देह को प्राप्त होता है, देवादि देह, जो “अहम्' नहीं है, उसमें अहंभावरूप
भ्रान्ति को प्राप्त होता है, तथा गन्धर्वो से या अन्य देवताओं से सुरक्षित अमरावती आदि
नगरों में निवास करता है