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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 64, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 64, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 64 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

तत्रेमाः परमादर्शे चिद्व्योम्न्यनुभवात्मिकाः । असंख्याः प्रतिबिम्बन्ति जगज्जालपरम्पराः ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

उसीमे सब नाम और रूपों का व्याकरण होता है, ऐसा कहते है । परम आदर्शङूप चिदाकाश में अनुभवरूप इन अनन्त जगज्जालपरम्परा ओका प्रतिबिम्ब पडता है