Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 66, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 66, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 66 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
यथा करतले बिल्वं यथा वा पर्वतः पुरः ।
प्रत्यक्षमेव तस्यालमजत्वं परमात्मनः ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे हाथ में रक्खा हुआ बिल्वफल अथवा सामने स्थित पर्वत सबके
प्रत्यक्ष ही रहते हैँ, तिरोहित नहीं रहते, वैसे ही उक्तलक्षण तत्त्ववेत्ता की जन्मादि विकारशून्य
ब्रह्मता अत्यन्त प्रत्यक्ष ही हे, किरीसे तिरोहित नहीं है