Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 67, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
नानाकारणतां यातश्चित्स्पन्दो मुच्यते चिरात् ।
कश्चिज्जन्मसहस्रेण कश्चिदेकेन जन्मना ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
विविध हजारों योनियों को देनेवाले कर्म, कारण ओर दैव को प्राप्त हुआ कोई चित्स्पन्द,
जिसकी शास्त्रीय प्रवृत्ति मन्द है, चिरकाल में मुक्ति पा जाता है, किसीको मुक्ति पाने में
हजारों जन्म बीत जाते हैं और कोई, जिसे ज्ञानाधिकार प्राप्त हो गया है, एक ही जन्म में मुक्त
हो जाता है