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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, Verse 35

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 67, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 35

संस्कृत श्लोक

स्फटिकान्तःसन्निवेशः स्थाणुताऽवेदनाद्यथा । शुद्धेऽनानापि नानेव तथा ब्रह्मोदरे जगत् ॥ ३५ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे स्फटिक के अन्दर प्रतिबिम्बित वन आदि यह प्रतिबिम्ब है, ऐसा जाने बिना सत्य प्रतीत होता है, वैसे ही शुद्ध ब्रह्म के अन्दर अद्वितीय भी यह जगत्‌ भिन्न-सा प्रतीत होता है