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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 67, Verse 55

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 67, verse 55 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 55

संस्कृत श्लोक

इत्येवमादि जीवस्य राघवाद्यतनस्य च । उदेति प्रतिभासात्मा देह एवातिवाहिकः ॥ ५५ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, इस प्रकार आदि जीव यानी समष्टिरूप और अद्यतन (व्यष्टि) जीव का प्रतिभासस्वरूप आतिवाहिक ही शरीर उत्पन्न होता है