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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 68, Verses 2–8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 68, verses 2–8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 68 · श्लोक 2-8

संस्कृत श्लोक

अस्ति कज्जलपङ्काद्रेरिवोग्रा शालभञ्जिका । हिमाद्रेरुत्तरे पार्श्वे कर्कटी नाम राक्षसी ॥ २ ॥ विषूचिकाभिधाना च नाम्नाप्यन्यायवाधिका । विन्ध्याटवीव देहेन शुष्का कार्श्यमुपागता ॥ ३ ॥ महाबलाग्निनयना रोदोरन्ध्रार्धपूरणी । नीलाम्बरधरा कृष्णा देहबद्धेव यामिनी ॥ ४ ॥ नीहारवसनच्छन्ना मेदुराभ्रशिरःपटा । लम्बाभ्रबिम्बोल्लसिता नित्योत्थतिमिरोर्ध्वजा ॥ ५ ॥ स्थिरविद्युल्लतानेत्रा तमालतरुजानुका । वैदूर्यशूर्पाग्रनखी भस्मनीहारहासिनी ॥ ६ ॥ निर्मांसनरदेहौघपुष्पस्रग्दामभूषिता । सर्वाङ्गोदात्तसंप्रोतशवमालाविराजिता ॥ ७ ॥ वेतालावेशविचलत्कालकङ्कालकुण्डला । अर्कादानोत्कदीर्घाग्रभीमोग्रभुजमण्डला ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

हिमालय पर्वत के उत्तर बगल में काजल के पंक से या काजल के पर्वत से बनाई गई प्रतिमा के समान काली, उग्र कर्म करनेवाली कर्कटीनाम की राक्षसी थी । उसके दो नाम थे-एक विसूचिका और दूसरा अन्यायबाधिका । वह विन्ध्याचल के समान शरीर से शुष्क और बड़ी कृशता को प्राप्त हुई थी । वह बड़ी बलवती थी, उसके नेत्र अग्नि के सदृश देदीप्यमान थे, उसका शरीर इतना विशाल था कि वह आकाश और पृथिवीके मध्यवर्ती भाग को अपने शरीर से आधा भर देती थी । वह नीले वस्त्र पहनती थी और ऐसी काली थी कि मालूम पड़ता था मानों मूर्तिमती अँधेरी रात हो । कुहरारूपी वस्त्र से वह आच्छादित रहती थी, बडे विशाल बादल ही उसके उत्तरीय वस्त्रका काम देते थे, वह जलसे भरे मेघमण्डल के समान उल्लास को प्राप्त हुई थी, कभी नष्ट न होनेवाले अन्धकार के समान काले उसके केश थे, सदा रहनेवाली बिजली की रेखा के समान उसके नेत्र थे, उसकी पिण्डलियाँ तमाल के पेड के समान लम्बी थी, वैदूर्यमणि के रंग के समान रंगवाले तथा सूप के अग्रभाग के आकार के समान आकारवाले उसके नख थे, भस्म ओर तुषार के समान उसका हास था, मांसरहित अनेक नरकंकालरूपी फूलों की माला ही उसका अलंकार था, सर्वागमें खूब पिरोई गई नरमाला से वह विराजमान थी, वेतालो के साथ नाचने के आवेश में उसके काले-काले नरकंकालरूपी कुण्डल दायें वायं हिलते थे, उसका विशाल भुजमण्डल का अग्रभाग सूर्य को पकड़ने के लिए उत्कण्ठित-सा था, इससे बड़ा भयावना प्रतीत होता था