Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 69, Verses 10–12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 69, verses 10–12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 69 · श्लोक 10-12
संस्कृत श्लोक
सूक्ष्मया मायया सर्वलोकहिंसां करिष्यसि ।
दुर्भोजना दुरारम्भा मूर्खा दुःस्थितयश्च ये ॥ १० ॥
दुर्देशवासिनो दुष्टास्तेषां हिंसां करिष्यसि ।
प्रविश्याऽऽहृदयं प्राणैः पद्मप्लीहादिबाधनात् ॥ ११ ॥
वातलेखात्मिका व्याधिर्भविष्यसि विषूचिका ।
सगुणं विगुणं चैव जनमासादयिष्यसि ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
अपनी अलक्ष्य माया द्वारा सब लोगों की तुम हिंसा करोगी,
जिनका आहारविहार समुचित नहीं है, दुष्ट देशों में रहते हैं, ऐसे मर्यादारहित मूर्ख तथा दुष्ट
लोगों की तुम हिंसा करोगी । प्राणा द्वारा अपान वायु के स्थान से हृदय तक प्रवेश कर हृदयपद्म,
प्लीहा आदि के पीडन द्वारा वायुरूपी विसूचिका व्याधि होओगी, शास्त्र में प्रतिपादित सदाचार
में निष्ठा रखनेवाले पुरुषों को या उससे रहित पुरूषों को तुम प्राप्त करोगी