Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 69, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 69, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 69 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
ब्रह्मोवाच ।
पुत्रि कर्कटिके रक्षःकुलशैलाभ्रमालिके ।
उत्तिष्ठ त्वं तु तुष्टोऽस्मि गृहाणाभिमतं वरम् ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे कर्कटि, तुम राक्षसरूपी कुलपर्वत की मेघमाला हो, उठो, तुम्हारे लिए मैं
सन्तुष्ट हुआ ह । तुम्हें जो वर चाहिए, माँगो