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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 7, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 7, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 7 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

एष सर्वमिदं विश्वं न विश्वं चैष सर्वगः । विद्यते ह्येष एवैको न तु विश्वाभिधास्ति दृक् ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

शका- क्या वह देह से परिच्छिन्नही है ? समाधान - नहीं, वह सर्वव्यापक विश्वरूप है । सम्पूर्ण पदार्थो के अधिष्ठानरूप से सर्वव्यापिता दिखलाने के लिए उसको विश्वरूप कहा है, यह भाव हे । केवल एकमात्र इसीकी सत्ता है । विश्वात्मकं द्रष्टा नहीं है अर्थात्‌ उससे अतिरिक्त विश्व की सत्ता नहीं है