Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 70, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 70, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 70 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
स्वार्थक्रियोग्रसामर्थ्याद्याति भावनयान्यताम् ।
पदार्थोऽभिमतांशाढ्यो निःश्वासेनेव दर्पणः ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
विचार करने योग्य चित्त के रहते उसे पूवापर विचारणा कयो नहीं हुई, इस पर कहते हैं।
ईच्छित विषयमे लगा हुआ चित्त ईच्छित वस्तु में दृढ प्रयत्न की अनुल्लंघनीय सामर्थ्य से
भावना द्वारा पूर्व निर्मल अवस्था से अन्य अवस्था को यानी कालुष्य को प्राप्त होता है, जैसे
कि निर्मल दर्पण निःश्वासवायु से मलिनता को प्राप्त होता है