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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 70, Verse 23

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 70, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 70 · श्लोक 23

संस्कृत श्लोक

नाशोऽपि सुखयत्यज्ञमेकवस्त्वतिरागिणम् । सूचीभूता विदेहापि परितुष्टैव राक्षसी ॥ २३ ॥

हिन्दी अर्थ

एक वस्तु में अत्यन्त अनुराग करनेवाले अज्ञानी को अपना नाश भी सुख देता है, सूचिका बनी हुई राक्षसी देहरहित होने पर भी सन्तुष्ट ही रही