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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 73, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 73, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

शक्र उवाच । सूचीवृत्तपिशाचत्वं तपसोपार्ज्य तत्तया । कर्कट्या हिममर्कट्या के भुक्ता विभवा मुने ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

कर के हिमालय की बन्दरी-सी उस कर्कटी ने किन-किन भोगों का भोग किया ?