Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 73, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 73, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
रजःकणगृहस्थाणुशिरस्येकेन सानुना ।
पादेनातिष्ठदुद्ग्रीवं शिखीव गिरिमूर्धनि ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
वह एक ही पैर के प्रान्त
से स्थित लोहसूची पर्वत के शिखरपर गध द्वारा प्रतिष्ठापित देवप्रतिमा के समान हुई ॥ ३ ९॥
धूलीकणरूपी घर में स्थित स्थाणु के सिर में एक अत्यन्त सूक्ष्म पैर से पर्वत शिखर में मयूर
के समान ऊपर को गर्दन करके वह खडी हुई