Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 73, Verse 44
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 73, verse 44 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 44
संस्कृत श्लोक
अतः सूचिस्तयाधारस्तपसे परिकल्पिता ।
दृढः सुसदृशोऽर्थानां विनियोगो हि राजते ॥ ४४ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे भारवाही पुरूष भार को छोड़ करके सुखी होकर
अपने स्थान को जाता है, वैसे ही गीध भी विसूचिका को उतार कर अपने देशको चला
गया, उस समय जिस पुरूष की व्याधि निवृत्त हो गई हो, ऐसे पुरुष के समान स्वस्थ
हुआ ॥४ ३॥ उस जीवसूची ने तपस्या के लिए लोहसूची को आधार बनाया, पदार्थो का खूब
विचार कर किया गया यथोचित विनियोग शोभित होता है