Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 73, Verse 51
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 73, verse 51 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 51
संस्कृत श्लोक
सा तस्य संवित्क्षिप्रार्धेनैव सर्वगता सती ।
परमार्चिरिवाविघ्नं सहसैव ददर्श ह ॥ ५१ ॥
हिन्दी अर्थ
शीघ्रता से युक्त वायु
की संविद् ने (देवताने) एक अंश से ही सम्पूर्ण दिशाओं का पर्यालोचन कर सर्वोत्कृष्ट
ब्रह्मज्योति के समान बिना किसी विघ्नबाधा के सहसा सब कुछ देख लिया