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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 73, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 73, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

यस्यां नाड्यां नभोवायुर्माति तत्तामुपेतया । तत्र शूलं कृतं स्थूलन्यग्रोधाग्र इवोत्कटम् ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

जिस नाड़ी में रोगों का आश्रयभूत बाह्यवायु भरा रहता है, उस नाडी को प्राप्त होकर उसने उस नाडी में अत्यन्त उत्कट शूलरूपी वेदना ऐसे उत्पन्न की, जैसे कि दक्षिणामूर्ति के विशाल वटवृक्षकी नाडीमें शेवशूल गाडा गया था