Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 73, Verse 60
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 73, verse 60 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 60
संस्कृत श्लोक
वातस्कन्धेभ्य एवादौ पतितानिलवेदना ।
क्रमेणानेन पर्यन्ते तेनैव प्रसृतोऽञ्जसा ॥ ६० ॥
हिन्दी अर्थ
पहले वायुसंविद् (वायुदेवता) वातस्कन्धो
से (उनचास वायुओं के स्तरों से) अवतीर्णं हुई । जहाँ से वायु की संवित् अवतीर्णं हुई, उसी
मार्ग से वायु भी अनायास अवतीर्ण हुआ