Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 76, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 76, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
एवं स्थिता मौनवती शुश्राव गगनाद्गिरम् ।
रक्षःस्वरूपसंत्यागतुष्टेनोक्तां नभस्वता ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : श्रीरामजी, मौन होकर बैठी हुई उसने राक्षसस्वभाव का परित्याग
करने से सन्तुष्ट हुए वायु द्वारा कही गई वाणी आकाश से सुनी