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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 79, Verse 1

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 79, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 79 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । इत्युक्त्वा राक्षसी प्रश्नान्सा वक्तुमुपचक्रमे । उच्यतामिति राज्ञोक्ते तानिमान्शृणु राघव ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स श्रीरामचन्द्रजी, पूर्वोक्त कथन के अनन्तर राजा के अपने प्रश्नों को कहो, यों अनुमति देनेपर राक्षसी ने प्रश्न करना आरम्भ किया इन प्रश्नों को आप सुनिये

सर्ग सन्दर्भ

अठहत्तरवाँ सर्ग समाप्त उन्नासीवों सर्ग कर्कटी का अनात्मज्ञ पुरुषों के लिए वज के तुल्य ओर आत्मज्ञानी पुरुषों के लिए मनोज्ञ बहत्तर प्रश्न करना ।