Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 80, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 80, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 80 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
तत्संवित्त्या वह्निसत्ता तेनात्यक्तानलाकृतिः ।
सर्वगोऽप्यदहत्येव स जगद्द्रव्यपावकः ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
अग्निता का त्याग नहीं करता हुआ कौन अदाहक अग्नि है, इस प्रश्न का उत्तर देते हैं।
आत्मसत्ता से अग्नि की सत्ता है, इसलिए अग्नि के आकार का त्याग किये बिना ही
सर्वव्यापक वह दाह नहीं करता है, भाव यह कि आत्मसत्ता से ही अग्नि की सत्ता है,उसके
सर्वगत होने के कारण सबमें स्थित भी वह जलाता ही नहीं है, इससे वह सर्वगत नहीं है, ऐसा
नहीं समझना चाहिए, क्योंकि वह सब पदार्थो का अग्नि के समान प्रकाशक हे