Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 80, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 80, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 80 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
संवेदनाद्यदर्कादिप्रकाशस्य प्रकाशकः ।
न नश्यत्यात्मभारूपो महाकल्पाम्बुदैरपि ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
चन्द्रमा, सूर्य, अग्नि और तारों से भिन्न होता हुआ भी कौन अविनाशी प्रकाशक है ? इस
प्रश्न का उत्तर देते हैं।
जो अपने ज्ञान से सूर्य आदि के प्रकाश का भी प्रकाशक है ओर महाकल्प के प्रलय कालीन
मेघों से भी जो नष्ट नहीं होता, वह आत्मप्रभारूप अविनाशी प्रकाश है