Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 81, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
त्यजता संस्थितं सर्वं चिन्मात्रपरमाणुना ।
त्यक्तं जगदसंवित्त्या संवित्त्या सर्वमाश्रितम् ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
सवका त्याग कर रहे किस अणुने इस सम्पूर्ण जगत् को आश्रित कर दिया है, इसका उत्तर
कहते हैं।
सम्पूर्ण जगत का त्याग कर रहे चिन्मात्र परमाणु ने यह सब विश्व आश्रित (आच्छादित)
कर रक्खा है