Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, Verse 56
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 81, verse 56 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 56
संस्कृत श्लोक
जगत्सत्तोदिते यं हि शुद्धचित्परमाणुतः ।
परमाणोश्च भोक्तृत्वकर्तृत्वे केवलं स्थिते ॥ ५६ ॥
हिन्दी अर्थ
शुद्ध चैतन्यरूप परमाणु से यह जगत्सत्ता
उदित हुई है और क्रिया और भोग के सम्बन्ध के बिना ही परमाणु में कर्तुत्व और भोक्तृव
स्थित हैं