Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, Verse 80
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 81, verse 80 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 80
संस्कृत श्लोक
अस्येच्छया पृथङ्नास्ति वीचितेव महाम्भसः ।
इच्छानुरूपसंपत्तेर्भावितार्थैकता किल ॥ ८० ॥
हिन्दी अर्थ
किसकी इच्छा से यह पृथक् है, इस प्रश्न का उत्तर देते हैं।
जैसे जलराशि से तरंगता पृथक् नहीं है, वैसे ही इच्छानुरूप सम्पत्तिवाले इसकी इच्छासे
भावित अर्थो की एकता पृथक् नहीं है