Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 82, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 82, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 82 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
राजोवाच ।
यद्येवं फुल्लपद्माक्षि परदेहैकभोजने ।
किं स्याच्छरीरवृत्त्यै ते स्थिताया मत्समीहिते ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
राजा ने कहा : हे प्रफुल्लित कमल के सदृश नेत्रवाली राक्षसी, दूसरे जीवों की देह से अपना
जीवन-निर्वाह करनेवाली हे कर्कटी, यदि ऐसा है, तो मेरे अभीष्ट अहिंसा के व्रत में स्थित हुई
तुम्हारे शरीर का निर्वाह केसे होगा ?