Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 82, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 82, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 82 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
हिंसित्वा रक्तमांसानि संत्यक्ता ये महाजनाः ।
तेभ्यो विधुरनाडीभ्यो ये जातास्तेऽपि तादृशाः ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
मारकर, रक्त ओर
मांस को चूसकर जो बहुतसे लोग मैंने छोडे, रक्तसंचार से रहित नाडीवाले उन लोगों से जो
लोग उत्पन्न हुए वे भी वैसे ही हुए यानी किसी प्रकार उनका जीवन रहनेपर भी उनके वंशजो
में भी रक्तरहितता हुई, इसलिए हिंसा अत्यन्त अनर्थकारिणी है