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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 82, Verse 52

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 82, verse 52 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 82 · श्लोक 52

संस्कृत श्लोक

प्रभातेऽन्तःपुरे तस्थौ पुरन्ध्रीजनलीलया । राक्षसी मन्त्रिराजानौ स्वव्यापारौ बभूवतुः ॥ ५२ ॥

हिन्दी अर्थ

प्रातःकाल होने पर वह राक्षसी सती-साध्वी स्त्रीकी लीला से अन्तःपुर में स्थित हुई और राजा एवं मन्त्री अपने-अपने कार्य में लगे