Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 83, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 83, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
सर्वास्तत्र महोत्पातान्पिशाचादिभयान्यपि ।
रोगांश्च योगसंसिद्धा निवारयति राक्षसी ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
यह योगसिद्ध राक्षसी वहाँ पर जो
बड़े-बड़े उत्पात, पिशाच आदिका भय, ओर रोग उत्पन्न होते हैं, उन सबकी निवृत्ति करती
है