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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 85, Verse 1

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 85, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 85 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । पुरा मे ब्रह्मणा प्रोक्तं सर्वं तत्कथयानघ । यदिदं तत्प्रवक्ष्यामि त्वयि पृच्छति राघव ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामजी, मुझसे जो यह पहले ब्रह्माने कहा था, उस सबको मैं ब्रह्मा से कहे गये एेन्दवोपाख्यान द्वारा आपसे कहता हूँ, क्योंकि आप मुझसे पूछ रहे हैं

सर्ग सन्दर्भ

चौरासीवाँ सर्ग समाप्त प्रचासीवों सर्ग सृष्टि करने की इच्छा कर रहे ब्रह्मा का दस ब्रह्माण्डों को देखना, वहाँ के एक सूर्य द्वारा उनके यथार्थ तत्त्वका वर्णन ।