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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 85, Verse 20

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 85, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 85 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

नभोनीलोत्पलस्यान्तर्भ्रमदभ्रमधुव्रतम् । प्रस्फुरत्तारकाजालकेसरापूर्णतां गतम् ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

जिसमें आकाशरूपी नीलोत्पल के मध्यमें मेघरूपी भ्रमर घूम रहे हैं तथा चमकते हुए तारासमूहरूपी केसरसे पूर्णता को प्राप्त जगत्‌ सरोवर के सदुश स्थित है