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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 85, Verse 30

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 85, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 85 · श्लोक 30

संस्कृत श्लोक

युगकल्पक्षणलवकलाकाष्ठाकलङ्कितः । कालो वहत्यकलितसर्वनाशप्रतीक्षकः ॥ ३० ॥

हिन्दी अर्थ

उन लोकों के मध्य में युग, कल्प, क्षण, लव, कला, काष्ठा आदि से युक्त अतर्कित सबके विनाश की प्रतीक्षा करनेवाला काल बहता है