Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 85, Verse 38
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 85, verse 38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 85 · श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
अथ मद्वाक्यसंदर्भे लीला चेत्तव सर्वग ।
अचिन्तितां मदुत्पत्तिं तच्छृणुष्व वदाम्यहम् ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे सर्वव्यापिन्, यदि मेरे वाक्य-सन्दर्भ
को सुनने में आपको कौतुक हो, तो आपके द्वारा जिसका संकल्प नहीं किया गया था, ऐसी
अपनी उत्पत्ति को आपसे कहता हूँ, सुनिये