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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 86, Verse 50

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 86, verse 50 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 86 · श्लोक 50

संस्कृत श्लोक

इति भावितया बुद्ध्या ते द्विजा अथ ऐन्दवाः । दशाद्रिवृत्तयस्तस्थुः समुत्कीर्णा इवोपलात् ॥ ५० ॥

हिन्दी अर्थ

इसके अनन्तर वे दस ऐन्दव ब्राह्मण इस प्रकार क भावित बुद्धि से पत्थर में खुदी हुई प्रतिमाओं की तरह बद्धासन होकर पर्वत के तुल्य अटलरूप से स्थित हुए