Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 88, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 88, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 88 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
बहुकालं यदभ्यस्तं मनसा दृढनिश्चयम् ।
शापेनापि न तस्यास्ति क्षयो नष्टेऽपि देहके ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
नहीं हो सकता, देहका भले ही विनाश हो जाय, पर वह ज्योका त्यों बना रहता हे