Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 89, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 89, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 89 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
अयमिन्द्रोऽयमिन्द्रश्चेत्येवं जातप्रलापया ।
लज्जापि हि तया त्यक्ता वैवश्यमनुयातया ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
यह इन्द्र है, यह इन्द्र है, इस प्रकार वह प्रलाप करती थी । कामदेव की पराधीनता
को प्राप्त हुई उसने लज्जा का भी परित्याग कर दिया था