Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 89, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 89, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 89 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
केनचित्त्वथ कालेन तस्या इन्द्रानुरागिता ।
सा ज्ञाता राजसिंहेन तन्मुखव्योमचन्द्रिका ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
कुछ समय के बाद राजा को उस अहल्या के मुखरूपी आकाश
को प्रकाशित करनेवाली इन्द्रानुरागिता ज्ञात हुई