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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 89, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 89, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 89 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

मनःकारणकं तस्माज्जगद्विविधविभ्रमम् । इन्द्रस्याहल्यया सार्धं वृत्तान्तोऽत्र निदर्शनम् ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

इसलिए यह निश्चित हुआ कि सम्पूर्ण भ्रमो से पूर्ण जगत्‌ मन से ही उत्पन्न हुआ है, इस विषय में इन्द्रका अहल्या के साथ जो वृत्तान्त हुआ हे, वह दृष्टान्त है