Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 92, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 92, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
यथा यथासौ यतते मनोदेहो हि देहिनाम् ।
तथा तथासौ भवति स्वनिश्चयफलैकभाक् ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे उस पर दुःख का आघात नहीं होता वैसे ही उसकी सुखकी अभिवृद्धि भी बढ़ती है,
ऐसा कहते हैं।
प्राणियों का मनोमय शरीर जैसे जैसे प्रयत्न करता है वैसे वैसे वह स्वनिश्चयके फल का
भाजन होता है