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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 93, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 93, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

यास्त्वन्याश्चिच्छक्तयः सर्वशक्तेरभिन्ना एव कल्प्यन्ते ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

जो अन्य (व्यष्टिअहंकारोपाधि से उपहित) चिदाभास हैं, वे सब सर्वशक्तिमान्‌ ब्रह्म से अभिन्न ही हैं