Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 95, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 95, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 95 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
किं तत्कृतं भवत्येव भगवन्ब्रूहि तत्त्वतः ।
एनं मे संशयं स्फारं छिन्धि वेद्यविदांवर ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
भगवन्, इसलिए आप यथार्थतः मुझसे कहिए कि किया हुआ कर्म फलरूप से अवश्य परिणत
होता है या नहीं ? मेरे इस महान् संशय को आप दूर कीजिए । आप तत्त्वज्ञो में सर्वश्रेष्ठ हैं,
इसलिए आपमें ही मेरे संशय को दूर करने की सामर्थ्य है