Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 96, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 96, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 96 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
सर्वस्य दृश्यजालस्य परमात्मन्यलक्षिते ।
प्रकृतत्वेन भावानां लोके प्रकृतिरुच्यते ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
अलक्षित परमात्मा में सम्पूर्ण दुश्यजाल की उपादन से अभिन्न कर्ताङूप से रचना करता है,
अतएव वह सब पदार्थो की प्रकृति कहा जाता है