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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 97, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 97, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 97 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

आत्मा सर्वपदातीतः सर्वगः सर्वसंश्रयः । तत्प्रसादेन संसारे मनो धावति वल्गति ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

आत्मा सर्वातीत होता हुआ सर्वव्यापक और सर्वाधार है। मन आदि में गति आदि क्रियाएँ परमात्मा के प्रभावसे ही होती हैं, स्वतः नहीं होती, ऐसा कहते हैं। आत्मा के प्रसाद से ही मन संसार में दौड़ता है, यानी संसाररूप में प्रस्पन्दित होता है