Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 99, Verse 33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 99, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 99 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
सहस्रनेत्रहस्तत्वं यत्पुंसः परिवर्णितम् ।
तदनन्ताकृतित्वं हि चेतसः परिदर्शितम् ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
जो मैंने पुरूष के हजारों नेत्रों
ओर भुजाओं का वर्णन किया है, उससे चित्त की असंख्य आकृतिर्यो हैं, यह दर्शाया है