Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 1, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 1, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 1 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
इदं बीजेऽङ्कुर इव दृश्यमास्ते महाशये ।
ब्रूते य एवमज्ञत्वमेतत्तस्यास्ति शैशवम् ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
भगवन्, प्रलय में अपनी सत्ता से कारण में जगत
है, इस प्रकार के बोधवाले कपिल आदि क्या अज्ञानी हैं अथवा ज्ञानी हैं यह बात मुझसे स्पष्टरूपसे
सब संशयो की शान्ति के लिए यथा योम्य किये २०॥ श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामचन्द्रजी, महाप्रलय
में बीज में अंकुर के तुल्य यह दृश्य रहता है ऐसी अज्ञान भरी बात जो कहता है, उसका यह जगत की सत्यता
में दृढ विश्वासरूप बालकपन ही है