Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 1, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 1, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 1 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
बीजे किलाङ्कुर इव जगदास्त इतीह या ।
बुद्धिः सा सत्प्रलापार्थं मूढा श्रृणु कथं किल ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
बीज में अंकुर के समान प्रलय में जगत है, यह दृष्टान्त विषम है; क्योकि कूटस्थचिदेकरस आत्मा
में बीजत्व का ही सम्भव नहीं है, इस आशय से कहते हैं।
बीज में अंकुर के तुल्य प्रलय में जगत है, इस प्रकार की प्रलय में जगत सत्ता का दृष्टान्त देने के
लिए जो बुद्धि है, वह भ्रान्ति है । केसे भ्रान्ति हे ? यह यदि कहिये, तो सुनिये