Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 10, Verse 34

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 10, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 34

संस्कृत श्लोक

अब्बिम्बितस्य चन्द्रस्य चलने कर्त्रकर्तृते । न सत्ये नानृते यद्वत्तद्वत्कालस्य सृष्टिषु ॥ ३४ ॥

हिन्दी अर्थ

“न कर्तृत्वं न कर्माणि लोकस्य सृजति प्रभुः (भगवान मनुष्यों के कर्तृत्व ओर शुभाशुभ कर्मों की सृष्टि नहीं करते हैं) इत्यादि भगवान द्वारा प्रदर्शित पक्ष का अवलम्बन करके कहते हैं। विविध वृक्षों में रंग-बिरंगे फूलों की तरह इन भुवनों में प्राणी स्वयं आते हैं और जाते हैँ । इस विषय में कर्ता आदि शब्दों से काल ही कल्पित होता है ॥३ ३॥ जैसे जल में प्रतिबिम्बित चन्द्रमा के चलन में कर्तृता और अकर्तृता परमार्थ दृष्टि से उसका अभाव होने के कारण सत्य नहीं हैं और व्यवहारदृष्टि से संवाद होने के कारण वे असत्य भी नहीं हैं वैसे ही सृष्टियों में कालरूप परमात्मा के कर्तृत्व और अकर्तृत्व परमार्थदृष्टि से सृष्टि का अभाव होने से सत्य नहीं हैं और व्यवहार दृष्टि से असत्य भी नहीं हैं